संस्कृत सप्ताह 2017
यथा ह्येकन चक्रेण न रथस्य गतिभर्व त
एवं परुष का रेण विना देव न सिध्दयति
. अर्थात जैसे एक पहिए से रथ नहीं चल सकता उसी प्रकार बिना पुरुषार्थ के भाग्य सिद्ध
नहीं हो सकता है।
यथा ह्येकन चक्रेण न रथस्य गतिभर्व त
एवं परुष का रेण विना देव न सिध्दयति
. अर्थात जैसे एक पहिए से रथ नहीं चल सकता उसी प्रकार बिना पुरुषार्थ के भाग्य सिद्ध
नहीं हो सकता है।
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