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शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

                                                     संस्कृत  सप्ताह 2017
                यथा  ह्येकन चक्रेण न रथस्य गतिभर्व त
                एवं परुष का रेण विना देव न सिध्दयति
.         अर्थात    जैसे एक पहिए से रथ नहीं चल सकता  उसी प्रकार बिना पुरुषार्थ के भाग्य सिद्ध
           नहीं हो सकता है।

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